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प्रो. एन आर मंडल

संकायाध्यक्ष (विद्यार्थी मामले)
महासागर एवं नौ शिल्प अभियांत्रिकी प्राध्यापक
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर 721302
deansa@hijli.iitkgp.ernet.in
Phone: +91-3222-282038 (Off.)
Fax: +91-3222-255303

प्रो. एन.आर.मंडल जुलाई 2012 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में विद्यार्थी मामलों के संकायाध्यक्ष बने हैं। आप महासागर एवं नौ शिल्प अभियांत्रिकी विभाग में प्राध्यापक हैं। आप भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में वर्ष 1987 से सेवारत हैं। आपका सभी के साथ बहुत ही मैत्रीपूर्ण व्यवहार रहता है और बेहिचक कोई भी विद्यार्थी कभी भी आपसे कार्यालय मे मिल सकता है। विभिन्न नियमों, निर्देशिकाओं, रैगिंग विरोधी मानकों, विद्यार्थियों तथा अभिभावकों की वचनबद्धता आदि की पूर्ण जानकारी करें।

 

 

 

 

 

 

 

 


प्रिय मित्र,

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर मे आपका स्वागत है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप इस समय उतने ही आनंदित होंगे जैसा कि मैंने 41 वर्ष पहले अनुभव किया था। आपके जीवन का सपना यही रहा होगा और आपने बहुत ही शानदार एवं जोशीले जीवन का प्रारम्भ किया है।

आपने निश्चित ही देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक का चयन किया है जिसका एक बहुत ही गौरवशाली इतिहास है। मुझे यह कहते हुए विशेष खुशी हो रही है कि आपने अपने विशेष जीवन पथ पर प्रथम कदम रखे हैं और यहां रहने के दौरान आप अपने जीवन की सर्वाधिक प्रिय स्मृतियों को जिएंगे और आजीवन आप उन यादों को सहेज कर रखेंगे।
यह परिसर शहर से थोड़ा दूर है, यहां का वातावरण और परिवेश स्नेह से परिपूर्ण है और आपकी शैक्षणिक तथा व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यकताओं में सहायक है और उनके अनुकूल है। परिवेश में चहुंओर हरित आच्छादित वातावरण है और विद्यार्थियों के छात्रावास, शैक्षणिक परिसर एवं संकाय तथा कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्रों से युक्त है। विद्यार्थी जीवन की गुणवत्ता में और अधिक वृद्धि के लिए सतत प्रयास किए जाते रहते हैं और अब शीघ्र ही आप इन सबका अभिन्न अंग बनेंगे।

मैं ह्रदय से आशा करता हूं कि आप अपने अध्ययन के साथ ही अपनी रुचि के अनुकूल वर्ष भर चलते रहने वाले कुछ अन्य क्रियाकलापों में भी सहभागिता करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं हमारा उद्देश्य आपके व्यक्त्तिव का सर्वोत्तम विकास करना है और आईआईटी स्नातक बनाने के साथ ही एक उत्तरदायित्वशील नागरिक के रुप में आपका निर्माण करना है। यहां के छात्रावास में आपका प्रवास आपको शीघ्र ही यहां के परिवार का अंग बना देगा। आने वाले वर्षों में जब आप अपने पुराने किसी साथी से मिलेंगे तो निश्चित ही यहां की सुखद स्मृतियों को दुहराएंगे और आनंदित होंगे।

मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि आईआईटी खड़गपुर के प्रभावी नियमों तथा नियमावलियों को भी ध्यान में रखें जिनसे हम सब बंधे हुए हैं और जिनका निर्माण हम सब के जीवन में अनुशासन के भाव को जागृत करना है। इनका उद्देश्य आपकी स्वतंत्रताओं का हनन करना नहीं है बल्कि इनका उद्देश्य आपको एक सुपरिभाषित पथ से आपके जीवन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करना है।

आप लोग में से अधिकांशतः पहली बार अपने घर से अपने माता-पिता के लाड़ प्यार की छत्रछाया से बाहर निकले हैं। यहां आप स्वतंत्र अस्तित्व की हवा में पहली सांस लेंगे किंतु कुछ लोगों को यह थोड़ा सा असहज लग सकता है। ऐसी परिस्थिति में मायूस मत होइए, और निःसंकोच हमसे संपर्क करिए। हम साथ मिलकर आने वाली सब संभावित कठिनाइयों पर विजय पाएंगे।

आपसे शीघ्र मिलने की आशा में-

आप सभी का शुभेच्छु,
एन.आर.मंडल
संकायाध्यक्ष (छात्र मामले)
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर

 

 


संदेश भेजें ई मेल पता: deansa@hijli.iitkgp.ernet.in

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सामान्य आचरण के नियम एवं दिशा निर्देश



आईआईटी खड़गपुर युवा वयस्कों के रुप में अपने छात्रों को सम्मान देता है और उनमें विश्वास रखता है। सामान्यतः अधिकांश छात्रों को परिसर जीवन व्यवस्थित और सौहार्दपूर्ण लगता है। देश के वयस्क नागरिकों के रूप में छात्रों को उनके अधिकारों का आनंद लेने दिया जाता है और साथ ही उनकी जिम्मेदारियों से अवगत होने की उम्मीद भी की जाती है। संस्थान देश के कानून के रूप में किसी भी ऐसे कार्य का समर्थन नहीं करेंगे जो गैरकानूनी है। वयस्क के रूप में, छात्रों को यह स्पष्ट निष्पक्ष भावना से समझ होनी चाहिए कि क्या कानूनी है और क्या गैरकानूनी है। संस्थान के अंदर और संस्थान के बाहर उन्हें ऐसे आचरण करना चाहिए जो इस महान संस्थान की गरिमा के अनुकूल हो। परिपक्व और आचरण में जिम्मेदार होने के अलावा, छात्रों को आईआईटी समुदाय के अन्य सदस्यों के अधिकारों का सम्मान करने की उम्मीद कर हैं। संस्थान छात्रों के व्यक्तित्व और उनके प्रगतिशील और रचनात्मक सोच के एक सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करता है। साथ ही वे प्रभावी ढंग से नागरिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करें तथा उसी क्रम में संस्थान के छात्रों द्वारा संस्थान के आचरण संबंधी नियमों एवं शर्तों का पालन किया जाना चाहिए। अगर आप इन शर्तों का उल्लंघन कर रहे हैं तो संस्थान विभिन्न सीनेट समितियों के माध्यम से कार्रवाई कर सकता है।

सामाजिक आचरण

रैगिंग पूरी तरह अवैध है और भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार सबसे कठोरता से इससे निपटना चाहिए और प्रत्येक मामले में दंडनीय है। मादक पदार्थों को रखना और उपयोग गैरकानूनी है। परिसर में शराब का सेवन या जुआ निषिद्ध है तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में धूम्रपान सख्त निषिद्ध है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। विभिन्न हॉस्टल के छात्रों पर सभी आचरण नियम, लागू होते हैं और समय-समय पर हॉल प्रबंधन समिति / वार्डनों / टीएसजी के माध्यम से अवगत करा दिया जाता है। ये नियम www.iitkgp.ac.in/dosa/ पर उपलब्ध है और इन नियमों का कड़ाई के साथ पालन किया जाना चाहिए।

प्रत्येक विद्यार्थी को संस्थान के अध्यापकों. प्रशासकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, आगंतुकों एवं निवासियों के प्रति सम्मान से व्यवहार करना चाहिए। साथी विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन नहीं करना चाहिए।

किसी अपरिहार्य बीमारी, पारिवारिक मामले आदि के कारण लेने वाली गैर योजना की छुट्टियों आदि के मामले में विद्यार्थी को अपने वार्डन, संकाय परामर्शदाता और संबंधित विभागाध्यक्ष को सूचित करना चाहिए।

संस्थान की सुविधाओँ/सुविधा साधनों जैसे कि पुस्तकालय, इंटरनेट, खेल के मैदान, छात्रावास, जिमखाना, प्रयोगशालाएं एवं कक्षाओं आदि को उत्तरदायित्व के साथ प्रयोग करना चाहिए। जानबूझकर हानि पहुंचाने अथवा दुरुपयोग करने पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी।

कोई भी विद्यार्थी परिसर में कोई भी मोटर वाहन नहीं रखेगा। अपवादस्वरुप क्यूआईपी विद्यार्थियों, प्रायोजित विद्यार्थियों, शारीरिक रुप से भिन्न समर्थ एवं रक्षा सैनिकों को विशिष्ट अनुमति संकायाध्यक्ष (छात्र मामले) से लेनी होगी।

परिसर में किसी भी अवैध क्रियाकलाप की घटना में संस्थान पुलिस कार्रवाई तथा न्यायिक हस्तक्षेप की अनुमति देगा।
परिसर के बाह विद्यार्थियों का किसी ऐसी कार्रवाई में भाग लेना जो देश के कानून के हिसाब से दंडनीय है, संस्थान उन्हें कोई सहयोग नहीं देगा और न उनके कृत्य के लिए उत्तरदायी होगा।
संबंधित हॉल के वार्डन किसी भी निवासी छात्र को आचरण नियमों का उल्लंघन करने पर पर भर्त्सना कर सकते हैं अथवा अर्थदंड निर्धारित कर सकते हैं या नियमानुसार कोई कार्रवाई कर सकते हैं।
अनुशासन हीनता के सभी बड़े मामले जिनका विद्यार्थी समुदाय पर प्रभाव पड़ सकता हो और जिसके लिए किसी एक समान औपचारिक प्रकृति की जांच की आवश्यकता हो, ऐसे मामले विद्यार्थी अनुशासन समिति को सौंप दिए जाएंगे। इस समिति की अनुशंसा पर सीनेट के अध्यक्ष के नाते निदेशक संस्तुत दंड का अनुमोदन करता है। अनुशासन स्थाई समिति में निम्नलिखित पदेन एवं अन्य सदस्य होते हैं-

संकायाध्यक्ष (छात्र मामले)- अध्यक्ष
अध्यक्ष, छात्रावास प्रबंधन समिति-सदस्य
संबंधित छात्र के छात्रावास के वार्डन, जहां का छात्र है- सदस्य
सीनेट द्वारा नामित एक संकाय सदस्य – दो वर्ष के लिए रोटेशन से- सदस्य प्रौद्योगिकी छात्र जिमखाना, उपाध्यक्ष- सदस्य
संकायाध्यक्ष, छात्र मामले द्वारा नामित सीनेट में नामित एक छात्र- सदस्य उपकुलसचिव (शैक्षणिक)- सद्स्य-सचिव, इनके अतिरिक्त अध्यक्ष मामले या कार्रवाई से संबंधित व्यक्ति अथवा व्यक्तियों को आमंत्रित कर सकता है यदि उनकी उपस्थिति मामले के निर्णय करने में आवश्यक हो।
यदि कोई विद्यार्थी दंड से असहमत है तो वह अध्यक्ष सीनेट के सामने उचित कारण देते हुए प्रतिवेदन कर सही उपचार की मांग कर सकता है।

(क) छात्रावास में (ख) विभाग अथवा कक्षा में (ग) अन्य किसी स्थान पर किए गए अपराध के लिए क्रमशः वार्डन, विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष (छात्र मामले) को भर्त्सना करने अथवा अर्थ दंड लगाने अथवा कोई अन्य समुचित कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
भर्त्सना के अतिरिक्त अन्य सभी मामले जिनमें दंड शामिल हो स्थाई अनुशासन समिति के अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने के मामले परीक्षा अनुचित साधनों का प्रयोग समिति द्वारा सुलझाए जाएंगे, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे :
प्रोफेसर-इन-चार्ज परीक्षा - अध्यक्ष
विभाग के प्रमुख जिसके छात्र अंतर्गत आता है - सदस्य
मामले की रिपोर्टिंग निरीक्षक - सदस्य
निरीक्षक प्रभारी परीक्षा संबंधित हॉल - सदस्य
संबंधित प्रश्नपत्र बनाने वाला - सदस्य
दो साल की अवधि के लिए स्नातक एवं मूल्यांकन समिति द्वारा नामित संकाय के दो सदस्यों - सदस्य
सहायक कुलसचिव (अकादमिक) - सचिव
समिति सजा देने के लिए सीनेट के अध्यक्ष को प्रत्येक मामले में उपयुक्त उपायों की सिफारिश करेगी।

 

 


आईआईटी खड़गपुर के सभी छात्रों के लिए अनिवार्य पठन सामग्री है। इस प्रकार के रूप में रैगिंग की कानूनी परिभाषा है:



'रैगिंग' का अर्थ किसी भी ऐसे काम के करने से है जिससे किसी भी छात्र को शारीरिक, मनोवैज्ञानिक अथवा भौतिक हानि की जाए अथवा होने की आशंका बनती हो अथवा शर्मनाक अथवा शर्मिंदगी की स्थिति उत्पन्न होती हो जिसमें निम्न स्थितियां शामिल हैं-
(क) चिढ़ाना या गंदे मजाक के खेल खेलना, या किसी भी छात्र को चोट पहुंचाना,
(b) (ख) किसी भी विद्यार्थी को ऐसा कोई भी काम करने के लिए कहना, या कुछ भी ऐसा करवाना जिसे कि वह साधारणतया करने का इच्छुक नहीं होता,
रैगिंग अन्य अपराधों से अलग तरह का अपराधा है क्योंकि इसका उद्देश्य संपूर्णतः विकृत सुख पाना है। रैगिंग अन्य अपराधों से इसलिए भी भिन्न है कि इसे समाज का एक हिस्सा प्रोत्साहित करता है।

निम्नप्रकार की गालियों तथा क्रियाकलापों को रैगिंग में माना जाएगा-

    • शारीरिक अपशब्द जैसे कि कुछ खाने, पीने, धूम्रपान के लिए मजबूर करना, अथवा कुछ कपड़े पहनने अथवा उतारने को मजबूर करना।,
    • शाब्दिक गाली देना, उदाहरणार्थ शब्द अथवा वाक्यांशों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष अपमानित करने वाले संदर्भ में उसके व्यक्तित्व, पहनावा, धर्म, जाति, परिवार अथवा अध्ययन के लिए चुने गए क्षेत्र को संदर्भ करते हुए अपशब्द कहना.
    • बलात कोई काम कराना उदाहरणार्थ-
      • वरिष्ठों के लिए कामकाज कराना, नोट्स की कापी कराना, कमरे साफ कराना, आदि
      • कक्षाओं से अनुपस्थिति कराना, पढ़ाई न करने देना, गाना, नाचना अथवा और कोई भी ऐसा ही काम करना, गंदी भाषा का प्रयोग करना अथवा चिल्लाना अथवा हर्ष में जोर से चिल्लाना। अजनबियों से बुरा बर्ताव करना विशेषतया महिलाओं से, अतार्किक समय पर जगना अथवा सोना,
      • अप्राकृतिक रुप में गाना अथवा नाचना.
      • अश्लील चित्र अथवा आपत्तिजनक सामग्री पढ़ना अथवा उपलब्ध कराना
      • जीवन चर्या पर बंदिशें-उदाहरणार्थ- कुछ विशेष प्रकार के कपड़े, सहायक कपड़े जैसे जीन्स, बैल्ट्स आदि न पहनने देना। बालों को कटाने अथवा तेल लगाने के लिए मजबूर करना। किसी खास किस्म की पोशाक पहनने को मजबूर करना, छात्रावास के किसी हिस्से जैसे कि सामाजिक कक्ष में जाने पर बंदिश लगाना।
      • वरिष्ठों को किसी विशेष संबोधन से बुलाने के लिए कहना जैसे सर अथवा मैडम। किसी खास समय पर ही जगने के लिए कहना
      • बातचीत में साजिश- किसी वरिष्ठ अथवा वरिष्ठों का कोई समूह बातचीत को अपने हिसाब से तोड़ता मरोड़ता है इस प्रकार कि प्रथम वर्ष के छात्र को यह अपमानजनक लगे कि वह मूर्ख है अथवा असुरक्षित है अथवा सामान्य रुप से धमकाया जा रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय के अवलोकन एवं निदेश

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की है कि शैक्षणिक परिसर अथवा जीवनक्रम के व्यवसाय में किसी वयस्क नागरिक के प्रवेश लेने पर देश के कानूनों के अनुसार जीवन जीने के अधिकार का हनन नहीं होना चाहिए

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार रैगिंग की कोई भी घटना प्रशासन अथवा संकाय के नोटिस में लाई जाती है तो यह विधिक वाध्यता है कि उसकी रिपोर्ट स्थानीय पुलिस में की जाए। अधिक विवरण के लिए देखिए - www.iitkgp.ac.in/dosa.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर में रैगिंग की किसी भी घटना को http://www.iitkgp.ac.in/dosa/ragging.php अथवा रैगिंग निरोधक निः शुल्क फोन नंबर सहायता 1 800-180-5522 पर रिपोर्ट किया जा सकता है।

 

वरिष्ठ विद्यार्थियों के लिए हमारे निदेश-

जहां वरिष्ठजन नवीन विद्यार्थियों से मित्रवत एवं शालीन व्यवहार करें और उनका स्वागत करें ऐसे परस्पर वार्तालाप को हम प्रोत्साहित करते हैं।

वरिष्ठजन क्लबों एवं अन्य कार्यकलापों में प्रोत्साहित करने की घोषणा करते हुए सही समय एवं स्थान पर उनकी सहभागिता कर सकते हैं। फिर भी किसी भी नए विद्यार्थी को भागलेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता । नए विद्यार्थी का भाग लेना उसकी इच्छा पर है। वरिष्ठ विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे स्वयं अनुशासन में रहेंगे और ऐसी किसी भी हरकत से बचेंगे, विशेषतया उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि-
जन सामान्य के बीच में वार्तालाप कैसा है,
नए विद्यार्थियों के कमरों में वार्तालाप के समय में जाना, उन्हें गाने, नाचने अथवा प्रतिभा खोज अथवा वार्तालाप के नाम पर मजबूर करना।
अति उत्साह में आकर नए विद्यार्थियों को सांस्कृतिक एवं खेलकूद में धकेलना,

आभार- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली की वेवसाइट पर उपलब्ध रैगिंग निरोधक घोषणाएं।

कार्यालय आदेश
पी के राघवन समिति की रैगिंग निरोधक 50 सिफारिशें
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश


Office Order

50 recommendations of the RK Raghavan Committee on ragging

Supreme Court Order

 

 

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भारत 721302
फोन- +91-3222-255221
फैक्स-+91-3222-255303

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